Insaniyat


इन्सान इस बात के लिये तो बड़ी हद तक आज़ाद है कि वो जो चाहे करे, अच्छा करे या बुरा करे। लेकिन उसे इस बात का इख़्तियार हरगिज़ नहीं है कि उसके करने का नतीजा भी वैसा ही निकले जैसा वो चाहता है। इसके लिये कायनात के बनाने वाले ने एक अटल क़ानून बना रखा है कि अगर वो बुरा करेगा तो उसके बुरे नतायज से हरगिज़ बच नहीं सकता भले ही वक़्ती तौर पर उसे ये ग़लतफ़हमी हो रही हो कि वो बुरे नतीजे से बच गया है। इसी तरह अगर वो कोई अच्छा अमल करेगा तो उसके अच्छे नतायज उसको मिल कर रहेंगे भले ही वक़्त तौर पर उसे लगता हो कि उसके अमल का कोई नतीजा बरामद नहीं हुआ

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