Insaniyat


नबी (सल्ल०) ने दुआ फ़रमाया करते कि-

“ऐ अल्लाह! मैं गुनाह और क़र्ज़ (मैं फँस जाने से) तेरी पनाह चाहता हूँ।”

हज़रत आयशा (रज़ि०) फ़रमाती हैं कि किसी कहने वाले ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ आप क़र्ज़ से इतनी पनाह क्यों माँगते हैं?

आप ﷺ ने फ़रमाया, “जब आदमी क़र्ज़ में डूब जाता है तो बात-बात पर झूट बोलता है और वादा करता है तो उसकी ख़िलाफ़वर्ज़ी करता है।” (हदीस मुस्लिम-1325)

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